NPS Structure for Government Employees | सरकारी कर्मचारियों के लिए NPS की संरचना

NPS से जुड़े सरकारी कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक सुव्यवस्थित NPS Structure बनाया है, जिससे कि कर्मचारियों को खाता खोलने से लेकर NPS में जमा धन के निकासी तक में कोई समस्या ना हो।

यदि हम NPS Structure के बारे में बात करें तो केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS और सार्वजनिक या कॉर्पोरेट क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए NPS में कोई बहुत अधिक अंतर नहीं है।

यह पेंशन योजना सभी लोगों के लिए एक समान है, चाहे वह केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी हों, कॉर्पोरेट कर्मचारी हों या अन्य व्यक्ति हों।

लेकिन जब इसके संचालन की बात आती है, तो केंद्र सरकार, राज्य सरकार के कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए इस योजना के कुछ नियमों में अंतर हो जाता है।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए New Pension Scheme को केंद्रीय स्वायत्त निकायों (CAB) तक भी विस्तारित किया गया है।

इसी तरह, राज्य सरकार के अंतर्गत New Pension Scheme को राज्यों के विकास प्राधिकरण के तहत राज्य स्वायत्त निकायों (SAB) तक विस्तारित किया गया है।

तो आईए जानते हैं कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS Structure कैसा होता है।

यह भी पढ़ें:
1. NPS के तहत सरकारी कर्मचारियों के लिए 6 प्रमुख Tax Benefits
2. Central Government Employees के लिए New Pension Scheme क्या है?

सरकारी कर्मचारियों के लिए NPS Structure:

यहाँ हमनें NPS के अंतर्गत आने वाले एक सरकारी कर्मचारी के NPS खाता खोलने से लेकर PRAN के आबंटन तक में भूमिका निभाने वाले कार्यालयों के बारे में जानकारी दी है।

DDO(Drawing and Disbursing Officer)-

NPS के तहत सरकारी कर्मचारियों के वेतन से Tier-I में उनके योगदान के लिए कटौती करना संबंधित DDO की जिम्मेदारी होती है। उसके बाद उस कटौती को Pay Bill के माध्यम से अपलोड करना भी DDO की ही जिम्मेदारी होती है।

किसी कर्मचारी के लिए PRAN के आबंटन की प्रक्रिया की शुरुआत भी DDO ही करता है। यह कर्मचारियों द्वारा प्राप्त Subscriber Registration Form को सत्यापित करके संबंधित PAO को भेजने का काम करता है।

PAO(Pay and Accounts Officer)-

सभी सरकारी विभाग या सरकारी संगठन में कर्मचारियों के वेतन वितरण की निगरानी उन विभागों या संगठन से सम्बद्ध PAO द्वारा की जाती है।

किसी विभाग या संगठन से सम्बद्ध PAO, उस विभाग या संगठन के किसी कर्मचारी का NPS Subscriber Registration Form प्राप्त करता है तो उसकी जिम्मेदारी होती है कि वह प्राप्त Subscriber Registration Form को सत्यापित करे और संबंधित नोडल अधिकारी को भेजे।

किसी सरकारी कार्यालय के कर्मचारियों के वेतन से Tier-I के लिए कटौती का भी मिलान करना भी उस कार्यालय से सम्बद्ध PAO ही करता है।

यदि मिलान करने के बाद सभी आँकड़े सही पाए जाते हैं तो वह CRA वेबसाईट में इसे अपलोड करता है।

नोडल अधिकारी-

NPS के अंतर्गत नोडल अधिकारियों की भी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे ग्राहकों के लिए मुख्य इंटरफ़ेस होते हैं।

नोडल कार्यालय का काम होता है Subscriber Registration Form को प्राप्त करना और PRAN के आबंटन के लिए CRA को भेजना।

इसके अलावा ग्राहकों के विवरण में परिवर्तन, ग्राहकों से निकासी संबंधित आवेदन प्राप्त करना और उनका सत्यापन करने के बाद आगे की कार्यवाही के लिए CRA को अग्रेषित करना।

Central Recordkeeping Agency(CRA):

किसी नोडल अधिकारी से किसी कर्मचारी का Subscriber Registration Form प्राप्त होने के बाद CRA उस Form में दिए गए विवरण के आधार पर उक्त कर्मचारी को PRAN(Permanent Retirement Account Number) का आबंटन करता है।

CRA की जिम्मेदारी है कि वह NPS के तहत सभी ग्राहकों के लिए रिकॉर्ड रखे, प्रशासन और ग्राहक सेवा (Customer Service) के कार्यों को अंजाम दे।

CRA प्रत्येक PRAN से संबंधित लेनदेन का रिकार्ड रखने के साथ ही डेटाबेस को भी maintain रखता है।

इस तरह हम कह सकते हैं कि NPS Structure के अंतर्गत एक बहु-स्तरीय प्रणाली कार्य करती है और इसीलिए सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ आम आदमियों के लिए भी यह सुचारू रूप से कार्य कर रही है।

सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए NPS में मुख्य अंतर:

हमनें इस बात का जिक्र पहले भी किया है कि NPS के अंतर्गत सभी Subscribers के लिए इसकी मूल संरचना समान ही रहती है। चाहे वह एक केंद्र सरकार का कर्मचारी हो या राज्य सरकार का कर्मचारी हो या आम नागरिक।

लेकिन इन सभी के लिए NPS के कुछ नियम और प्रक्रिया में अंतर होता ही है।

तो आईए जानते हैं कि सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए

NPS में पंजीकरण करवाने में अंतर-

किसी भी सरकारी कर्मचारी को NPS के तहत Tier-I खाता खुलवाना अनिवार्य होता है।

वह जैसे ही किसी सरकारी विभाग में नौकरी प्राप्त करता है तो उसी समय उसे Subscriber Registration Form भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने संबंधित DDO के पास जमा करना होता है।

उसके बाद आगे की कार्यवाही के लिए कर्मचारी की कोई भूमिका नहीं रह जाती है। अंत में जब CRA द्वारा कर्मचारी का PRAN Kit प्रेषित किया जाता है तो DDO की ही जिम्मेदारी होती है कि वह उक्त कर्मचारी को उसका PRAN Kit सुपुर्द करे।

आम नागरिकों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया बदल जाती है। वह दो तरीके से NPS के तहत अपना पंजीकरण कर सकता है और Tier-I में अपना खाता खुलवा सकता है।

पहला है offline प्रक्रिया – इसके तहत ग्राहक किसी भी POP-SP(Point of Presence – Service Providers) से Subscriber Registration Form प्राप्त कर सकता है।

उसके बाद उस Form को भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने नजदीकी POP-SP के पास जमा कर सकता है। आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद CRA द्वारा PRAN कार्ड उस व्यक्ति के पत्राचार पते पर भेज दिया जाता है।

यदि कोई व्यक्ति किसी बैंक से NPS खाता खुलवा रहा है और यदि उस बैंक में उक्त व्यक्ति का बैंक खाता नहीं है तो उसे KYC भी जमा करना पड़ता है।

दूसरा है online प्रक्रिया जिसमें ग्राहक को eNPS के वेबसाईट पर जाना होता है।

यहाँ दिए गए NPS के विकल्प पर जाने के बाद जरूरी व्यक्तिगत विवरण भरकर submit कर देना है। इसके बाद CRA द्वारा PRAN का आबंटन कर दिया जाता है।

NPS के खातों में योगदान (Contribution) की मात्रा में अंतर:

NPS के खातों में एक सरकारी कर्मचारी और आम नागरिक द्वारा योगदान देने की प्रक्रिया में भी बहुत बड़ा अंतर है।

किसी सरकारी कर्मचारी के Tier-I खाते में दोनों यानी कर्मचारी और सरकार द्वारा प्रत्येक माह योगदान दिया जाता है।

कर्मचारी द्वारा दिया गया योगदान उसके Basic Pay और DA के योग के 10% होता है और सरकार द्वारा कर्मचारी के Basic Pay और DA के योग के 14% दिया जाता है।

लेकिन किसी व्यक्ति के Tier-I खाते में केवल उसी के द्वारा योगदान दिया जाता है, इसमें सरकार कोई योगदान नहीं करती है। प्रत्येक माह यह योगदान Tier-I में कम-से-कम 500 रुपये और Tier-II में 250 रुपये होता है।

NPS के खातों में योगदान देने की प्रक्रिया में अंतर:

प्रत्येक माह सरकारी कर्मचारियों के Tier-I खाते में योगदान के लिए वेतन से कटौती करने का काम संबंधित DDO का होता है।

उसके बाद इस कटौती का विवरण वेतन बिल के साथ संबंधित PAO को भेज दिया जाता है। PAO द्वारा सीआरए सिस्टम में विवरण अपलोड किया जाता है।

यह विवरण जैसे ही CRA को प्राप्त होता है, वह कर्मचारी के NPS खाते में धन जमा कर देता है।

लेकिन किसी आम नागरिक को NPS खाते में योगदान देने के लिए इतनी लंबी प्रक्रिया नहीं होती है। वह आसानी से online अपने Tier-I खाते में धन जमा कर सकता है।

जनता के लिए एनपीएस के मामले में प्रक्रिया स्वयं शुरू की जा सकती है।

NPS के अंतर्गत फंड मैनेजर के चुनाव में अंतर:

Subscriber Registration Form भरते समय किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपना पसंदीदा फंड मैनेजर चुनने का विकल्प रहता है। वह 8 फंड मैनेजरों में से अपने पसंदीदा फंड मैनेजर चुन सकता है।

लेकिन यदि वह इस विकल्प का प्रयोग नहीं करता है तो उसके Tier-I खाते में जमा किए जाने वाले धन को पूर्वनिर्धारित तीन फंड मैनेजर LIC Pension Fund Limited, SBI Pension Funds Pvt. Limited और UTI Retirement Solutions Limited के बीच एक निश्चित अनुपात में निवेश कर दिया जाता है।

इसी तरह किसी व्यक्ति को भी खाता खोलते समय अपना पसंदीदा फंड मैनेजर चुनना होगा जो उसके निवेश का प्रबंधन करेंगे।

लेकिन यदि वह व्यक्ति किसी फंड मैनेजर को नहीं चुनता है तो पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के अनुसार एसबीआई पेंशन फंड प्राइवेट लिमिटेड डिफ़ॉल्ट पेंशन फंड मैनेजर के रूप में कार्य करेगा। यानी यह उस व्यक्ति के NPS में योगदान दिए गए धन का निवेश करेगा।

NPS के अंतर्गत Asset आबंटन के विकल्प में अंतर:

फंड मैनेजर का चुनाव करने के बाद Asset आबंटन के विकल्प को भी चुनना पड़ता है।

NPS के अंतर्गत चार तरह के Asset Class हैं- i) E-Equity ii) C-Corporate debt iii) G – Government Bonds iv) A-Alternative Investment Funds।

इनको चुनने के लिए भी दो विकल्प हैं – Active Choice और Auto Choice.

Active Choice के तहत किसी आम subscriber को ऊपर दिए गए चारों Assets में से किसी में भी अपने NPS के फंड का निवेश करने का विकल्प मिलता है।

लेकिन सरकारी कर्मचारियों के लिए Active Choice में तीन विकल्प E, C और A मौजूद नहीं है। सरकारी कर्मचारियों को केवल Auto Choice के तहत ही अपने NPS फंड का निवेश करना पड़ता है।

Auto Choice के अंतर्गत भी तीन तरह के विकल्प हैं –
i) LC 75- Equity में कुल Asset का अधिकतम 75% निवेश किया जा सकता है।
ii) LC 50 – Equity में कुल Asset का अधिकतम 50% निवेश किया जा सकता है।
iii) LC 25 – Equity में कुल Asset का अधिकतम 25% निवेश किया जा सकता है।

इन तीनों विकल्पों में भी सरकारी कर्मचारी केवल अंतिम दो यानी LC 50 और LC 25 में ही निवेश कर सकते हैं।

इसके अलावा व्यक्तिगत एनपीएस विकल्प के मामले में जहां पूरे योगदान को फंड मैनेजरों में स्थानांतरित किया जा सकता है वहीं सरकारी कर्मचारियों के लिए केवल incremental flow (fresh money) को नए फंड मैनेजरों में स्थानांतरित करने की अनुमति है।

संक्षिप्तकि:

1.सरकारी कर्मचारियों के लिए एक सुव्यवस्थित NPS Structure है जिसके अंतर्गत DDO, PAO, Nodal Officer और CRA आते हैं।

2. DDO अपने कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा प्राप्त NPS Subscriber Registration Form को सत्यापित करके संबंधित PAO को भेजने का काम करता है।

3. DDO की तरह ही PAO भी प्राप्त Subscriber Registration Form को सत्यापित करके नोडल अधिकारी को भेजता है।

4. नोडल कार्यालय Subscriber Registration Form को आगे की कार्यवाही और PRAN के आबंटन के लिए CRA को भेजता है।

5. अंत में CRA उस फॉर्म में दिए गए विवरण के आधार पर PRAN का आबंटन करता है और एक PRAN Kit संबंधित कर्मचारी के DDO के पास भेजता है।

6. सरकारी कर्मचारियों के लिए PRAN के आबंटन की जो प्रक्रिया होती है वह आम नागरिकों से अलग होती है।

7. सरकारी कर्मचारी के लिए पूर्वनिर्धारित तीन फंड मैनेजर हैं- LIC Pension Fund Limited, SBI Pension Funds Pvt. Limited और UTI Retirement Solutions Limited.

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