Share Market kya hota hai | What is Share Market in Hindi

Share Market kya hota hai- इस लेख में हम शेयर मार्केट के बारे में जानकारी लेने से पहले यह जानेंगे कि शेयर क्या होता है और कंपनियां इसे जारी (issue) क्यों करती हैं I

इस लेख का उद्देश्य शेयर मार्केट से शेयर खरीदने या बेचने से संबंधित जानकारी देना नहीं है। यहाँ हमनें बस शेयर मार्केट से संबंधित कुछ सामान्य जानकारी उपलब्ध कराई है।

जैसे – share market kya hota hai या शेयर किसे कहते हैं, हमारे देश में कौन-कौन से प्रमुख शेयर मार्केट हैं आदि

उसके बाद शेयर मार्केट से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण शब्दावलियों (Terminology) के बारे में भी हम यहाँ संक्षिप्त जानकारी दी है I 

तो आईए जानते हैं कि share market kya hota hai, लेकिन पहले यह जानेंगे कि शेयर क्या होता है।

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Share Market kya hota hai और इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ

Share क्या होता है:

Share शब्द का सामान्यतया हिंदी अर्थ होता है ‘अंश’ या ‘हिस्सा

जब इसी शब्द का प्रयोग शेयर मार्केट में होता है तो इसका अर्थ हो जाता है “कंपनियों में हिस्सा” I अर्थात जब आप किसी एक कंपनी के कुछ शेयर खरीद लेते हैं तो आप उस कंपनी में हिस्सेदार हो जाते हैं I

इसे एक उदाहरण से समझते हैं- 
यदि कोई कम्पनी 50 लाख रूपये इकठ्ठा करना चाहती है और उसने एक शेयर का मूल्य 100 रूपये रखा है तो उसे 50 हजार शेयर जारी करने पड़ेंगे I अब आप भी इनमें से कुछ शेयर खरीद कर कंपनी के हिस्सेदार बन सकते हैं I  

Share market kya hota hai या Stock market क्या है:

शेयर मार्केट या स्टॉक मार्केट ऐसी जगह है जहाँ सूचीबद्ध(listed) कंपनियों के शेयर या स्टॉक की खरीद-बिक्री की जाती है I

पहले के समय में जब कम्पूटर नहीं होते थे तो निवेशक शेयर मार्केट में जाकर शेयर खरीदते-बेचते थे I लेकिन अब शेयर की खरीद-बिक्री घर बैठे भी कंप्यूटर के जरिये की जा सकती है I 

Share और Stock में अंतर :–
Share –जब कोई व्यक्ति किसी विशेष कंपनी की हिस्सेदारी खरीदता है तो कहा जाता है कि उसने अमुक कंपनी का शेयर खरीदा है I  
Stock –जब कोई व्यक्ति एक या एक से अधिक कंपनियों की हिस्सेदारी खरीदता है तो कहा जाता है कि उसके पास अमुक कंपनियों के शेयर्स का स्टॉक है I साधारण शब्दों में Share के समूह को Stock कहते हैं I

Share market में कंपनियां धन कैसे एकत्रित करती हैं ?

कंपनियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए धन की आवश्यकता होती है और इसे एकत्रित करने के लिए कई अलग-अलग तरीके होते हैं जैसे Angel investors, Venture Capitalist, Bank, Share market इत्यादि I

कंपनियां इनसे दो तरह से धन ले सकती हैं, या तो ये Debt Financing के माध्यम से धन लें या Equity Financing के माध्यम से I

1. Debt Financing:

Debt का अर्थ होता है कर्ज या लोन।

जब कंपनी कहीं ऐसी जगह से पैसे लेती है जहाँ उसे कुछ दिनों बाद मूलधन और उसपर आये ब्याज सहित पैसे को वापस करना पड़ता है तो इसे Debt Financing कहते हैं I जैसे बैंक से उधार लेना I

2. Equity Financing:

जब कंपनी कहीं ऐसी जगह से पैसे लेती है जहाँ उसे ना तो लिए गए पैसे लौटाने पड़ते हैं ना ही उन पैसों पर कोई ब्याज देना पड़ता है तो इसे Equity Financing कहते हैं I

Angel Investor- ये एक निजी धनी व्यक्ति होता है जो ना किसी फर्म से ना ही किसी निवेश कोष से संबंध रखता है I वह अपने निजी धन को वहीं निवेश करता है जिसमें उसे भविष्य में लाभ की आशा होती है I वह सामान्यतया स्टार्टअप कंपनियों में निवेश करता है I
Venture capitalist– यह कोई फर्म या कम्पनी होती है जो किसी निवेशक का पैसा किसी अन्य उद्यम में लगाती है I 

चूँकि शेयर मार्केट से धन एकत्रित करना भी Equity Financing के अंतर्गत आता है इसलिए ये कंपनियां शेयर जारी करती हैं I इन शेयर्स को बेचने से कंपनियों को आसानी से धन मिल जाता है और शेयरधारकों को इन कंपनियों में भागीदारी मिल जाती है I 

Share market में IPO क्या होता है: –

जब कंपनी धन एकत्रित करने के लिए पहली बार शेयर्स जारी करती है तो उसे IPO अर्थात Initial Public Offering कहते हैं I

IPO के अंतर्गत सीधे कंपनी और निवेशकों के बीच लेनदेन होता है I निवेशक सीधे कंपनी को पैसा देते हैं और इसके बदले कंपनी इन निवेशकों को शेयर्स बेचकर अपनी कंपनी में भागीदार बना लेती है I

ये निवेशक खरीदे गए शेयर्स को तब तक नहीं बेच सकते जब तक वह कंपनी शेयर मार्केट में सूचीबद्ध नहीं हो जाती I कंपनी के सूचीबद्ध होने के बाद इन शेयर्स को शेयर बाजार में खरीदा-बेचा जा सकता है I

स्पष्टतः जब कोई व्यक्ति IPO के अंतर्गत शेयर खरीदता है तो वह सीधे कंपनी से खरीदता है और जब वह शेयर मार्केट से खरीदता है तो किसी शेयरधारक से खरीद रहा होता है I

Financial Market:

जहाँ पर Financial instruments जैसे की Stocks, Bonds, Securities, Debentures का क्रय-विक्रय होता है उसे Financial market कहते हैं I

Financial Market के प्रकार –

1. Money Market: –

यहाँ Financial instruments का लेनदेन Short-term अर्थात एक साल से कम समय के लिए किया जाता है I

यहाँ जिन Financial instruments का मुख्य रूप से लेनदेन होता है वह हैं – Treasury bills, call money, certificate of deposits, commercial papers, repurchase agreements इत्यादि I

इस मार्केट के अंतर्गत मुख्यतया बैंकों के बीच लेनदेन होता है I Money market को RBI नियंत्रित करती है I

2. Capital Market:-

यहाँ Financial instruments का लेनदेन Long-term अर्थात एक साल से अधिक समय के लिए किया जाता है I

इस मार्केट के माध्यम से कंपनी Stocks, Bonds जैसे Long-term Financial instruments को बेचकर पैसा एकत्रित करती है I इस मार्केट को SEBI regulate करती है I 

Capital Market के प्रकार: –

A. Primary Market / प्राथमिक बाजार

इस मार्केट में नए शेयर्स और बांड्स जारी किये जाते हैं I इन शेयर्स को कंपनी सीधे निवेशकों को बेचती है और उनसे पैसा एकत्रित करती है I

IPO इसी के अंतर्गत आता है I इस मार्केट से खरीदे गए शेयर्स को शेयर धारक तब तक नहीं बेच सकते जब तक वह कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं हो जाती I

B. Secondary Market / द्वितीयक बाजार-

जब कोई कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हो जाती है तो उसके शेयर खरीदे और बेचे जा सकते हैं I

इस तरह हम कह सकते हैं कि स्टॉक एक्सचेंज Secondary market के अंतर्गत आता है I

Secondary market में शेयर्स की खरीद-बिक्री में कंपनी शामिल नहीं होती I अब निवेशक ही शेयर्स का लेनदेन करते रहते हैं I

भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज:-

Share Market kya hota hai

शेयर मार्केट में ऐसी कंपनियां सूचीबद्ध होती हैं जिनके शेयरों को खरीदने और बेचने के लिए सार्वजनिक कर दिया जाता है अर्थात निवेशक उन शेयरों को खरीद और बेच सकते हैं।

स्टॉक एक्सचेंज एक बुनियादी ढांचा है जो उन शेयरों के व्यापार की सुविधा प्रदान करता है।

स्पष्ट तौर पर यदि स्टॉक एक्सचेंज नहीं होगा तो कंपनियों के पास शेयरों को सूचीबद्ध करने के लिए कोई औपचारिक तंत्र नहीं होगा और यदि स्टॉक मार्केट नहीं होगा तो स्टॉक एक्सचेंज का कोई अस्तित्व नहीं होगा।

भारत में SEBI द्वारा मान्यता प्राप्त 23 स्टॉक एक्सचेंज हैं –  

  1. वड़ोदरा स्टॉक एक्सचेंज, वडोदरा
  2. कोयंबटूर स्टॉक एक्सचेंज, कोयम्बटूर
  3. उत्तर प्रदेश स्टॉक एक्सचेंज, कानपुर
  4. मेरठ स्टॉक एक्सचेंज, मेरठ
  5. मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई
  6. ओवर द काउंटर एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया, मुंबई
  7. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई
  8. अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज, अहमदाबाद
  9. बैंगलुरू स्टॉक एक्सचेंज, बैंगलुरू
  10. भुवनेश्वर स्टॉक एक्सचेंज, भुवनेश्वर
  11. कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज, कोलकाता
  12. कोचीन स्टॉक एक्सचेंज, कोचीन
  13. दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज, दिल्ली
  14. गुवाहाटी स्टॉक एक्सचेंज, गुवाहाटी
  15. हैदराबाद स्टॉक एक्सचेंज, हैदराबाद
  16. जयपुर स्टॉक एक्सचेंज, जयपुर
  17. केनरा स्टॉक एक्सचेंज, मैंगलोर
  18. लुधियाना स्टॉक एक्सचेंज, लुधियाना
  19. चेन्नई स्टॉक एक्सचेंज, चेन्नई
  20. मध्य प्रदेश स्टॉक एक्सचेंज, इंदौर
  21. मगध स्टॉक एक्सचेंज, पटना
  22. पुणे स्टॉक एक्सचेंज, पुणे
  23. कैपिटल स्टॉक एक्सचेंज केरल लिमिटेड, तिरुवनंतपुरम, केरल

उपर्युक्त स्टॉक एक्सचेंज में से दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज  हैं – Bombay Stock Exchange(BSE) और National Stock Exchange(NSE)

Bombay Stock Exchange (BSE):–

यह भारत के साथ-साथ एशिया का भी सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।

वैसे तो बम्बई में शेयरों के खरीद-फरोख्त का काम बहुत पहले से हो रहा था पर इसके लिए 1875 में दलाल स्ट्रीट में स्थाई रूप से एक Association की शुरूआत की गयी जिसका नाम था ‘The Native Share & Stock Brokers Association’ I

बाद में इसका नाम बदलकर Bombay Stock Exchange कर दिया गया I

31 अगस्त 1957 को भारत सरकार के Securities Contract Regulation Act के तहत BSE को आधिकारिक तौर पर पहले स्टॉक एक्सचेंज की मान्यता मिली।

2 January 1986 को BSE ने देश के पहले Equity Index “S&P BSE SENSEX” की शुरुआत की I

14 मार्च 1995 को BSE ने BOLT (BSE On-Line Trading) System की शुरुआत की I इससे शेयर्स के ट्रेडिंग का काम जो कागजों पर होता था वह ऑनलाइन होने लगा I

9 January 2017 को BSE के अधीन India International Exchange की शुरुआत की गयी जो देश का पहला इंटरनेशनल एक्सचेंज है I 

BSE के Benchmark index को SENSEX कहा जाता है I यह BSE का संवेदी सूचकांक है I

यह दो शब्दों Sensitive के Sens तथा Index के Ex से मिलकर बना है I पहली बार इस शब्द का प्रयोग दीपक मोहोनी ने 1986 में किया था I तभी से BSE के संवेदनशीलता को दर्शाने के लिए इसका प्रयोग हो रहा है I 

National Stock Exchange (NSE):-

National Stock Exchange मुंबई में स्थित है और यह भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसकी स्थापना November1992 में हुई थी I

1994 में सबसे पहले NSE ने ही Electronic Exchange System की शुरुआत की थी और स्वचालित Electronic screen-based trading system प्रदान करने वाला देश का पहला स्टॉक एक्सचेंज बन गया I

NSE के संवेदी सूचकांक को NIFTY कहते हैं I NSE ने इसकी शुरुआत 1996 में की थी I Nifty दो शब्दों National और Fifty से मिलकर बना है।

इस इंडेक्स में भारतीय अर्थव्यवस्था के 12 क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कारोबार करने वाली 50 प्रमुख कंपनियां सूचीबद्ध हैं I इसलिए इसे NIFTY50 भी कहते हैं।

Securities and Exchange Board of India (SEBI):–

किसी भी बाजार को नियंत्रित और विनियमित(Regulate) करने के लिए कोई-ना-कोई संस्था जरुर होती है I

इसी तरह शेयर बाजार को भी नियंत्रित और विनियमित करने की आवश्यकता होती है, नहीं तो किसी भी एक व्यक्ति या कंपनी की धोखाधड़ी का खामियाजा सभी निवेशकों को भुगतना पड़ सकता है I

भारत में शेयर बाजार को नियंत्रित और विनियमित करने वाली संस्था का नाम है ‘SEBI’ I

Securities and Exchange Board of India अर्थात ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’ एक नियामक संस्था (Regulatory body) है जो प्रतिभूति बाजार (Securities Market) में शेयरों की खरीद-बिक्री को नियंत्रित करता है।

SEBI की स्थापना भारत सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर 12 अप्रैल 1988 को की गयी थी I इसकी स्थापना शेयर बाजार की निगरानी के लिए की गयी थी I

परन्तु शेयर बाजार में बढ़ती धोखाधड़ी के कारण सरकार को एक ऐसी संस्था की जरुरत थी जो इसे नियंत्रित और विनियमित कर सके I इसके लिए भारतीय संसद ने 1992 में SEBI Act, 1992 के द्वारा SEBI को वैधानिक अधिकार दे दिया I

SEBI का प्रधान कार्यालय मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्थित है I

इसके चार प्रादेशिक कार्यालय हैं – उत्तरी प्रादेशिक कार्यालय, नई दिल्ली ; दक्षिणी प्रादेशिक कार्यालय,चेन्नई ; पूर्वी प्रादेशिक कार्यालय, कोलकाता और पश्चिमी प्रादेशिक कार्यालय, अहमदाबाद I

इन प्रादेशिक कार्यालयों के अलावा कई अन्य स्थानीय कार्यालय भी हैं।

Share market से शेयर खरीदने की प्रक्रिया:-

कोई भी व्यक्ति स्टॉक एक्सचेंज से या IPO से शेयर खरीदना चाहता है तो सबसे पहले उसे एक Demat Account खुलवाना पड़ता है I

Demat Account किसी बैंक जैसे HDFC, ICICI, UNION BANK या किसी Brokerage Firm जैसे की Zerodha, Angel Broking, Sharekhan के माध्यम से खुलवाया जा सकता है।

Brokerage firm मध्यस्थ का काम करते हैं जिनके जरिये शेयर की खरीद-बिक्री की जाती है I इसके लिए ये Brokerage firm कुछ शुल्क लेते हैं।

ये Brokerage firm, Demat Account के साथ-साथ Trading Account भी खोलते हैं क्योंकि बिना Trading Account के शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती है I

शेयर खरीदने के लिए Bank account को Trading Account के साथ सम्बद्ध (link) करना पड़ता है I उसके बाद Bank account से पैसे Trading Account में भेजने पड़ते हैं I अब इन पैसों से शेयरों को खरीदा जा सकता है I

खरीदे हुए शेयरों को Demat Account में रखा जाता है I इस तरह Demat Account खरीदे हुए शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखने का काम करता है I

Stock Brokerage firms ने अपने-अपने मोबाइल एप्प और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर भी बना लिए हैं जिनके माध्यम से आप मोबाइल फोन और कंप्यूटर पर शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकते हैं।

Intraday trading – जब शेयर बाजार से किसी शेयर को जिस दिन खरीदा जाये और उसी दिन बेच भी दिया जाये तो इसे Intraday trading कहते है।
Delivery trading– जब शेयर बाजार से किसी शेयर को जिस दिन खरीदा जाये और उसी दिन ना बेचकर कुछ दिन बाद बेचा जाये तो उसे Delivery trading कहते हैं I इसके अंतर्गत खरीदे गए शेयर को खरीदने के दिन से दो दिन बाद Demat account में जमा कर दिया जाता है। इसे प्रचलित भाषा मे शेयर की डिलीवरी कहा जाता है। अब शेयर धारक इन शेयरों को अपनी इच्छानुसार कभी भी बेच सकता है, चाहे वह दस दिन बाद बेचे या दस साल बाद I

Share market में शेयरों से लाभ कैसे प्राप्त होता है:

शेयरों से हमें दो तरह से लाभ प्राप्त होता है –

1. Dividends/ लाभांश–

कंपनी जब प्राप्त लाभ का कुछ हिस्सा शेयर धारकों के मध्य वितरित कर देती है तो उसे Dividends या लाभांश कहते हैं I

लेकिन शेयर धारकों को लाभांश देना कम्पनी के लिए मज़बूरी नहीं होती I शेयर धारकों को लाभांश देना है या नहीं इसका फैसला कंपनी का Board of Directors करता है I

इसलिए शेयर धारक लाभांश पर ज्यादा निर्भर नहीं रहते I

2. Capital Appreciation-

Capital Appreciation का मतलब होता है खरीदे हुए शेयर के मूल्य में वृद्धि I अर्थात यह शेयर के क्रय मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर होता है I

उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी का शेयर 100 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीदता है और उस शेयर का मूल्य एक साल बाद 130 रूपए प्रति शेयर हो जाता है तो वह इस शेयर को बेचकर Capital Appreciation के अंतर्गत प्रति शेयर 30 रुपये का लाभ प्राप्त कर सकता है I

निष्कर्ष:

हमनें इस लेख में यह जाना कि Share market kya hota hai और इसमें शेयर क्या होते हैं I

शेयर मार्केट से सम्बंधित कुछ शब्दों जैसे –Share और Stock के बीच अंतर, Debt Financing और Equity Financing क्या है तथा  Intraday trading और Delivery trading के बीच अंतर के बारे में भी जाना I

भारत के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज BSE और NSE से सम्बंधित जानकारी के साथ- साथ इन्हें नियंत्रित करने वाली संस्था SEBI के विषय में भी जानकारी ली I

शेयरों से प्राप्त दो तरह के लाभ Dividend और Capital appreciation की भी संक्षिप्त जानकारी ली I

हमें उम्मीद है कि यह लेख आपलोगों को जरुर पसंद आया होगा I

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