क्रेडिट कार्ड के 16 अंकों की संख्या का अर्थ: Credit Card 16 Digits Number Meaning

Credit Card 16 Digits Number Meaning: वैसे तो केंद्र सरकार ने बहुत पहले से ही कैशलेस इंडिया अभियान चला रखा है, लेकिन COVID-19 के कारण भी भारत में ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा मिला है।

पेमेंट करने के लिए UPI के साथ ही credit या debit card का प्रयोग भी बहुत अधिक लोग कर रहे हैं।

अधिकतर लोगों के पास अब credit card की भी सुविधा उपलब्ध है। लेकिन इससे संबन्धित कई बातें कुछ लोगों को नहीं पता होती हैं। कार्ड से संबन्धित कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ  कार्ड पर अंकित 16 अंकों के नंबर में छुपी होती हैं।

तो आइए जानते हैं कि इस 16 अंकों के नंबर में क्या-क्या जानकारियाँ छुपी हैं। 



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Credit Card 16 Digits Number Meaning

Credit Card 16 Digits Number Meaning

शुरुआत के 6 अंक-

शुरुआत के 6 अंकों से credit card के जारीकर्ता की पहचान होती है। अर्थात credit card को किस क्षेत्र (जैसे एयरलाइन्स, ट्रैवेल, इंटरटेनमेंट, बैंकिंग और फाइनेंस, पेट्रोलियम, टेलिकम्युनिकेशन्स इत्यादि) के किस बैंक ने और किस कार्ड नेटवर्क (Visa, Mastercard, Rupay etc) के माध्यम से जारी किया है। 

इसीलिए शुरुआत के इन 6 अंकों को Issuer Identification Number (IIN) या Bank Identification Number (BIN) कहा जाता है।

अब इन 6 अंकों के बारे में विस्तार से जानते हैं-

क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के पहले छह अंकों का नंबर Major Industry Identifier (MII) और Issuer Identification Number (IIN) का संयुक्त रूप है।

इन 6 अंकों में से पहला अंक यह बताता है कि कार्ड को किस इंडस्ट्री ने जारी किया है। इसलिए पहले अंक को Major Industry Identifier (MII) कहा जाता है। यह अंक अलग-अलग इंडस्ट्री के लिए अलग-अलग होता है। जैसे कि –

1 और  2 – Airlines

3 – Travel and Entertainment

4 और  5 – Banking and Financial

6- Banking and Merchandising

7- Petroleum

8- Telecommunications and Health Care

9- National Assignment

पहले अंक से यह भी पता चलता है कि credit card किस कार्ड नेटवर्क का है। जैसे कि नीचे दिये गए उदाहरण से स्पष्ट है-

3 – Amex Credit Cards

4 – Visa Cards

5 – MasterCard

इस तरह यदि किसी credit card नंबर की शुरुआत 4 से होती है तो स्पष्ट है वह कार्ड बैंकिंग और फाइनेंस इंडस्ट्री से संबन्धित है और Visa कार्ड है। 

दूसरे अंक से लेकर छ्ठवे अंक तक-

शुरुआत के 6 अंकों में दूसरे अंक से लेकर छ्ठवे अंक तक की जो संख्या होती है उससे कार्ड के बारे में और भी विस्तृत जानकारी मिलती है। जैसे कि जारी करने वाले बैंक का नाम, कार्ड का प्रकार (credit, debit या prepaid card ), देश का नाम इत्यादि। इससे यह भी पता चलता है कि कार्ड किस स्तर का है यानि गोल्ड, सिल्वर, प्लेटिनम, बिजनेस और भी बहुत कुछ।

7 वें से लेकर 15 वें अंक तक- 

7वें से लेकर 15वें अंक तक का नंबर कार्ड होल्डर का प्राइमरी बैंक अकाउंट नंबर होता है।यह पूरी तरह से बैंक अकाउंट नंबर तो नहीं होता है। यह अकाउंट नंबर कार्ड के उपयोगकर्ता की पहचान कराता है। इसलिए यह भिन्न-भिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए भिन्न-भिन्न होता है। इससे बैंक को अपने उपभोक्ताओं को पहचानने में आसानी होती है।

16वां अंक- 

यह credit card का आखिरी अंक होता है। इसे Check Digit के नाम से जाना जाता है। इस अंक से यह पता चलता है कि कार्ड वैध है या नहीं।

इसे एक अंकगणितीय फोर्मूले के द्वारा प्राप्त किया जाता है जिसे Luhn Algorithm कहा जाता है। इस फोर्मूले की खोज Hans Peter Luhnने 1954 में की थी। यह फॉर्मूला कार्ड नंबर के शुरुआत के 15 अंकों पर लगाया जाता है और तब हमें 16वां अंक (check digit) प्राप्त होता है। 

इससे स्पष्ट है कि यदि कार्ड नंबर वैध नहीं है तो यह भी हमें गलत प्राप्त होगा। इसके उलट भी सही है कि यदि पेमेंट करते समय कार्ड नंबर के 15 अंकों में से कोई अंक गलत डाल दिया गया है जबकि check digit सही है तो भी पेमेंट नहीं हो पाएगा और कार्ड अवैध माना जाएगा। 

इसलिए कार्ड नंबर के 16वें अंक को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी पेमेंट के दौरान डाला गया कार्ड नंबर यदि गलत हो जाता है तो यह अंक उस पेमेंट को सफल होने से रोक देता है।

Luhn Algorithm से किसी कार्ड की वैधता की जाँच कैसे करें:-

उदाहरण के तौर पर एक credit card नंबर 4292 2935 8252 2876 की वैधता की जाँच करते हैं।

प्रथम चरण-

इसके लिए कार्ड नंबर के दाहिने ओर से शुरुआत करते हैं। यानि कि check digit से।

दाहिने ओर से जो भी अंक सम स्थान पर हैं (अर्थात प्रत्येक दूसरे स्थान पर) उन्हें 2 से गुणा करते हैं।

कार्ड नंबर 4292 2935 8252 2876 में दाहिने ओर से सम स्थान पर जो अंक हैं वो हैं- 7, 2, 5, 8, 3, 2, 9 और 4. 

अब इन्हें 2 से गुणा करते हैं –

7x 2 = 14

2 x 2 = 4

5x 2   = 10

8x 2   = 16

3x 2   = 6

2x 2   = 4

9x 2   = 18

दूसरा चरण-

गुणा करने के बाद जो संख्याएँ दो अंकों की हैं उनके अंकों को आपस में जोड़कर एक अंक की संख्या बना लेते हैं। यहाँ प्राप्त दो अंकों की संख्याएँ हैं – 14, 10 16 और 18

अब इनके अंकों को आपस में जोड़ दें-

14 ⇨   1+4= 5

10 ⇨   1+0= 1

16 ⇨   1+6= 7

18 ⇨   1+8 = 9

अब हमें जो अंक मिले हैं वो हैं = 5, 4, 1, 7, 6, 4, 9 

तीसरा चरण-

अब इन अंकों को कार्ड नंबर के विषम स्थान पर स्थित अंकों के साथ जोड़ देते हैं।

विषम स्थान पर स्थित अंक – 

(2, 2, 9, 5, 2, 2, 8, 6)

+(5, 4, 1, 7, 6, 4, 9)

=   36 + 36 = 72

चौथा चरण – 

अब अंतिम परिणाम को 10 से भाग देते हैं और यदि यह पूरी तरह से विभाजित नहीं होता है तो credit card नंबर वैध नहीं है।

यहाँ अंतिम परिणाम 72 है जो 10 से पूरी तरह से विभाजित नहीं हो सकता है, इसलिए कार्ड नंबर 4292 2935 8252 2876 वैध नहीं है।  

इस तरह हमने देखा कि किसी भी कार्ड पर अंकित 16 अंकों का नंबर अपने अंदर कितनी सूचनाएँ समाहित किए रहता है। इस नंबर के द्वारा कार्ड होल्डर के बारे में भी कुछ जानकारी हासिल की जा सकती है। किसी हैकर के लिए इतनी जानकारी भी काफी होती है। वह इतनी कम जानकारी से भी किसी को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए अपने कार्ड का प्रयोग सावधानी पूर्वक करें।

हमें उम्मीद है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। 

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