International Yoga Day 2022 : जानें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2022 थीम, इसका इतिहास और महत्व

International Yoga Day 2022: योग भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न यंग है और इसके महत्व के बारे में हिन्दू ग्रंथों में भी बताया गया है। ‘योग’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘युज’ और ‘युजीर’ के मिलने से हुईं है। इसका अर्थ है ‘एक साथ’ या ‘एकजुट होना’।

हमारे योग गुरुओं के कारण इसका प्रचार-प्रसार विदेशों में भी हुआ है और उनकी दिनचर्या में भी योग का महत्व बढ़ गया है। क्योंकि योग ना केवल शरीर के लिए सेहतमंद है बल्कि इससे मस्तिष्क को एकाग्र रखा जा सकता है। योग मन को भी शांति पहुँचाता है।

योग के इसी महत्व को बताने और इसे अन्तराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित-प्रचारित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) की शुरुआत की गई। इससे लोगों के अंदर योग को लेकर जागरूकता भी फैल रही है। लोग इसके महत्व को जानने लगे हैं।

विशेषकर इसकी महत्ता तब और भी बढ़ी है जब लोग कोरोना महामारी के कारण सांस की समस्याओं से ज्यादा परेशान हुए हैं। साथ ही लॉकडाउन के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया था और लोगों ने अपने मन को शांत रखने के लिए भी योग का सहारा लिया।

लेकिन International Yoga Day की शुरुआत कब हुईं? इसे क्यों 21 जून को ही मनाते हैं? इस सभी प्रश्नों के जवाब इस लेख में दिया गया है।

तो आईए सबसे पहले जानते हैं International Yoga Day के इतिहास के बारे में।

International Yoga Day की शुरुआत कैसे हुई?

27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) मनाने की अवधारणा का प्रस्ताव रखा। 11 दिसंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वीकार कर लिया। साथ ही 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के रूप में मनाने के प्रस्ताव को भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 177 देशों ने मंजूरी प्रदान कर दी।

उसके बाद 21 जून 2015 को विश्व भर में पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) मनाया गया और इसमें 84 देशों के 35,985 लोगों और प्रतिनिधियों ने दिल्ली के राजपथ पर 21 योग आसन किए।

पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अपने आप में एक रिकॉर्ड था। इस दिवस के आयोजन से संबंधित दो रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज किए गए। इसमें पहला रिकॉर्ड था 35,985 लोगों का साथ में योग करना और दूसरा रिकॉर्ड था 84 देशों के प्रतिनिधियों का एक साथ इस आयोजन में हिस्सा लेना।

21 जून को ही International Yoga Day क्यों मनाया जाता हैं?

अब प्रश्न यह उठता है कि 21 जून को ही International Yoga Day क्यों मनाया जाता है जबकि योग तो किसी भी दिन किया जा सकता है।

तो इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि उत्तरी गोलार्द्ध में 21 जून का दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। इस दिन को ग्रीष्म संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन के बाद सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन होने लगता है।

चूंकि 21 जून को सबसे लंबा दिन होता है तो सूर्य जल्दी निकलता है और देरी से डूबता है। जिसके कारण उस दिन सूर्य से बहुत ही अधिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का बहुत अधिक संचार रहता है।

कुछ लोगों का मानना है कि यह दिन सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए शुभ होता है।

International Yoga Day 2022 की थीम (Theme of International Yoga Day 2022)

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2022 की थीम है ‘Yoga for Humanity‘ अर्थात ‘मानवता के लिए योग’। इस साल इसी थीम के साथ पूरे विश्व में International Yoga Day 2022 मनाया जाएगा।

इस थीम को चुनने का कारण है कि कोरोना महामारी (COVID-19) के दौरान योग करके लोगों ने अपने मन को शांत बनाए रखा जिससे उनको स्वस्थ रहने में मदद मिली। इसलिए इस थीम को कोरोना महामारी के दौरान योग द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाने के लिए चुना गया है।

International Yoga Day 2022 का मुख्य आयोजन मैसूर में

इस साल 8 वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2022 का मुख्य आयोजन कर्नाटक राज्य के मैसूर जिले में होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस दिन यानि 21 जून को मैसूर पैलेस ग्राउंड से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। मैसूर में होने वाले इस मुख्य आयोजन में लगभग 15,000 लोग योगासन करने वाले हैं।

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