International Tiger Day 2022- तिथि, इतिहास और महत्व

International Tiger Day 2022 – पूरा विश्व आज International Tiger Day 2022 मना रहा है। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को पूरे विश्व में मनाया जाता है।

हर साल International Tiger Day मनाने का मुख्य उद्देश्य होता है- बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना।

पूरे विश्व में बाघों की संख्या बहुत कम हो चुकी है और इसीलिए इन्हें वन्यजीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में रखा जाता है।

एक समय ऐसा आया कि पूरे विश्व में बाघों की संख्या बहुत कम हो चुकी थी और ये विलुप्‍त‍ि के कगार पर पहुंच गए थे।

उसके बाद भारत ने इनके संरक्षण के लिए कई कदम उठाए और ‘Save the Tiger’ जैसे राष्ट्रीय अभियान चलाए। भारत के इन्हीं कोशिशों की देन है कि आज पूरे विश्व में सबसे अधिक बाघों की संख्या यहीं पर है। भारत में इनकी संख्या लगभग 3000 है जबकि पूरे विश्व में यह संख्या लगभग 4500 है।  

International Tiger Day 2022
International Tiger Day 2022

International Tiger Day History

बाघ हमारे देश का राष्ट्रीय पशु है और इसके संरक्षण के लिए सन 1973 में Project Tiger लॉन्च किया गया। इसके बावजूद भी 2010 में हमारे देश में बाघों की संख्या केवल 1700 रह गई थी। तब विश्व भर के देशों को इन्हें बचाने की चिंता हुई।

विश्व भर के केवल 13 देशों में ही बाघ पाए जाते हैं। इन देशों ने बाघ संरक्षण को प्रोत्साहित करने और बाघों की घटती संख्या के प्रति जागरूकता लाने के लिए 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) के रूप में मनाने की घोषणा की गई।

इस सम्मेलन में भाग लेने वाले देश- भारत, बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम

इस सम्मेलन में विश्‍व के सामने यह लक्ष्‍य रखा गया कि वर्ष 2022 तक बाघों की संख्‍या को दोगुना करेंगे। सम्मेलन में इस बात की पुष्टि की गई कि 1910 से लेकर 2010 तक बाघों की संख्या एक लाख से घटकर मात्र 3500 हो चुकी है। साथ ही उनका निवास 2000 से 2010 तक 40 प्रतिशत सिकुड़ गया है।

इस सम्मेलन के बाद भाग लेने वाले देशों ने अपनी तरफ से बहुत अच्छे प्रयास किए हैं जिनका नतीजा है कि केवल भारत में ही बाघों की संख्या 3000 के करीब और विश्व में 4500 के करीब पहुँचने वाली है। साथ ही इनके निवास क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के केरल, उत्तराखंड, बिहार और मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। नवीनतम बाघ गणना के अनुसार भारत में बाघों की संख्या 2,967 है, जो पूरे विश्व में पाए जाने वाले बाघों की संख्या का लगभग 70 प्रतिशत से अधिक है। इस तरह भारत में अभी भी बाघों की संख्या पूरे विश्व में सर्वाधिक बनी हुई है। अब तक के सबसे बड़े बाघ गणना के रूप में भारत का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में भी दर्ज कराया गया है।

International Tiger Day 2022 का महत्व

International Tiger Day इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों के अंदर बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता फैला सकें। इसका उद्देश्य विश्व स्तर पर बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना है

इसलिए यह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जितने अधिक लोग जागरूक होंगे उतने ही अधिक बाघ संरक्षण के मुद्दों का समर्थन करेंगे।  

दुनिया भर में बाघों के संरक्षण को लेकर कई तरह की समस्याएं हैं जैसे उनका अवैध शिकार, निवास स्थान का नुकसान, मनुष्यों के साथ संघर्ष आदि। इन समस्याओं के कारण भी हम इस अविश्वसनीय जीव को खोते जा रहे हैं और ये विलुप्ति के कगार पर हैं।  

इनमें सबसे बड़ी समस्या है इनका अवैध शिकार और अवैध व्यापार का होना। दुनियाभर में बाघ की हड्डी, त्वचा और शरीर के अन्य अंगों की मांग के कारण इनका अवैध शिकार और तस्करी हो रही है। हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपने घर की साज-सज्जा में बाघ की खाल का भी इस्तेमाल करते हैं। जिसके कारण इन वस्तुओं के निर्माण करने वाले उद्योगों में बाघ के शरीर के अंगों की मांग होती है।

इसके अलावा बाघ की हड्डियों का उपयोग दवाओं और टॉनिक बनाने के लिए भी किया जाता है। ये दवाईयां और टॉनिक बहुत ही महंगे होते हैं जिसके लालच में लोग बाघों का अवैध शिकार करने लगते हैं। इसलिए अवैध शिकार और बाघों के अंगों के अवैध व्यापार को समाप्त करने के लिए बहुत ही मेहनत करने की आवश्यकता है।

और यह तभी हो सकता है जब लोगों के अंदर बाघ संरक्षण को लेकर जागरूकता पैदा हो। लोग जितना अधिक जागरूक होंगे उतना ही इस तरह की वस्तुओं की मांग कम होगी और इससे बाघों का अवैध शिकार और उनका अवैध व्यापार रुकेगा।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का भी यही उद्देश्य है कि लोगों को अधिक से अधिक बाघ संरक्षण की प्रति जागरूक किया जाए।

भारत में टाइगर रिजर्व

जब साल 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया गया था तो उस समय भारत में सिर्फ 9 टाइगर रिजर्व थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 52 हो गई है।

भारत में स्थिति टाइगर रिजर्व –

बांदीपुर (कर्नाटक), कॉर्बेट (उत्तराखंड), कान्हा (मध्य प्रदेश), मानस (असम), मेलघाट (महाराष्ट्र), पलामू (झारखंड), रणथंभौर (राजस्थान), सिमिलिपाल (ओडिशा), सुंदरबन (पश्चिम बंगाल), पेरियार (केरल), सरिस्का (राजस्थान), बक्सा (पश्चिम बंगाल), इंद्रावती (छत्तीसगढ़), नमदाफा (अरुणाचल प्रदेश), दुधवा (उत्तर प्रदेश), कलाकड़-मुंडनथुराई (तमिलनाडु), वाल्मीकि (बिहार), पेंच (मध्य प्रदेश), तडोबा-अंधारी (महाराष्ट्र), बांधवगढ़ और पन्ना (मध्य प्रदेश), डम्पा (मिजोरम), भद्रा (कर्नाटक), पक्के या पाखुई (अरुणाचल प्रदेश), नामेरी (असम), सतपुड़ा (मध्य प्रदेश), अनामलाई (तमिलनाडु), उदंती-सीतानदी (छत्तीसगढ़), सतकोसिया (ओडिशा), काजीरंगा (असम), अचानकमार (छत्तीसगढ़), दांदेली-अंशी टाइगर रिजर्व (काली) कर्नाटक, संजय-दुबरी (मध्य प्रदेश), मुदुमलाई (तमिलनाडु), नागरहोल (कर्नाटक), परम्बिकुलम (केरल), सह्याद्री (महाराष्ट्र), बिलिगिरी रंगनाथ मंदिर (कर्नाटक), कवल (तेलंगाना), सत्यमंगलम (तमिलनाडु), मुकंदरा हिल्स (राजस्थान), नवेगांव-नागजीरा (महाराष्ट्र), अमराबाद (तेलंगाना), पीलीभीत (उत्तर प्रदेश), बोर (महाराष्ट्र), राजाजी (उत्तराखंड), ओरंग (असम), कमलांग (अरुणाचल प्रदेश), श्रीविल्लीपुथुर – मेगामलाई (तमिलनाडु) और रामगढ़ विषधारी (राजस्थान)

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