Swachh Bharat Abhiyan Essay in Hindi


SWACHH BHARAT ABHIYAN ESSAY IN HINDI
स्वच्छ भारत अभियान पर निबंध

भूमिका:-

आप अपने घर के लोगों या मित्रों के बीच अक्सर यह जरूर सुनते होंगे कि अमुक व्यक्ति या परिवार कितनी साफसफाई के साथ रहता है। या यह सुनते होंगे कि अमुक शहर कितना साफसुथरा है और घूमने लायक है।

 

इस तरह हम कह सकते हैं कि स्वच्छता किसी देश, शहर, परिवार या व्यक्ति की सभ्यता की पहचान होती है। चाहे वह देश या व्यक्ति कितना ही गरीब क्यों ना हो, स्वच्छता से उसकी अलग ही पहचान बनती है।

 

ठीक इसके विपरीत यदि  कोई व्यक्ति या देश आर्थिक रूप से कितना भी मजबूत क्यों ना हो, यदि वह स्वच्छता की तरफ ध्यान नहीं देता है तो उसकी एक नकारात्मक पहचान बन जाती है।

 

यदि स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें, तो यह कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसलिए स्वस्थ मस्तिष्क के लिए हमें स्वस्थ रहना जरूरी है और हम तभी स्वस्थ रह सकते हैं जब हमारे आसपास साफसफाई हो।  

 

स्वच्छता ना केवल किसी व्यक्ति या घर तक ही सीमित रहनी चाहिए, बल्कि यह पूरे शहर, राज्य या देश के लिए भी जरूरी है।

 

हमारे देश के लिए यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि लोग स्वच्छता को लेकर बहुत गंभीर नहीं हैं। हमारा देश आर्थिक रूप से मजबूत तो होता गया लेकिन स्वच्छता को लेकर किसी भी सरकार ने कड़े दिशानिर्देश जारी नहीं किए। जिसके कारण हमारे देश में दिनप्रतिदिन गंदगी बढ़ती गयी और विश्व स्तर पर स्वच्छता की रैंकिंग में हमारा देश पिछड़ता चला गया।

 

गंदगी के कारण पर्यटन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कोई विदेशी पर्यटक किसी देश में जाने से पहले यह भी देखता है कि वहाँ कितनी साफसफाई है। गंदगी के कारण हमारे देश की विश्व स्तर पर नकारात्मक छवि बन गयी है। जिससे पर्यटन में भी कमी आई है।  

 

हमारे यहाँ गाँव के अधिकतर लोग आज भी शौच के लिए खुले में बाहर जाते हैं। खुले में शौच के कारण गाँवो में तरहतरह की बीमारियाँ जन्म लेती हैं। वैसे गाँव में घरों में लोग साफसफाई रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन शौचालय के प्रचलन ना होने के कारण उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।

 

अपने देश के शहरों में लोग घरों की सफाई रखते हैं और शौचालय का भी प्रयोग करते हैं लेकिन घर से निकली गंदगी को फेंकने के लिए एक उचित स्थान ना मिलने के कारण उन्हें वो गंदगी रास्ते या किसी गड्ढे में फेंकना पड़ता है। 

 

इतना ही नहीं अन्य जगहों जैसे फैक्ट्री, कारख़ाना से निकली गंदगी के निपटान की भी उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण शहरों में साफसफाई नहीं रहती है।

 

इसी को देखते हुए भारत सरकार ने 2014 में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य प्रत्येक शहर और गाँव में स्वच्छता के स्तर को बढ़ाना है और स्वच्छता के प्रति लोगों के अंदर जागरूकता को बढ़ावा देना है।

 

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत:-

SWACHH BHARAT ABHIYAN ESSAY IN HINDI

 

स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत महात्मा गांधी की 145 वीं जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2014 को की गई। इस अभियान का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया। उसी दिन उन्होंने राजपथ पर लोगों को संबोधित करते हुए स्वच्छ भारत अभियान में शामिल होने और इसे सफल बनाने की अपील की।

 

उन्होने अपने सम्बोधन में महात्मा गांधी जी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए लोगों का आह्वान किया।

 

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों की नामचीन हस्तियों को आमंत्रित किया और इस अभियान का हिस्सा बनने तथा अपना सहयोग प्रदान करने के लिए कहा। प्रधानमंत्री ने इन लोगों से कहा कि वे सफाई अभियानों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करें और अन्य लोगों को भी अपने साथ जोड़ें ताकि यह एक श्रृंखला बन जाए। आम जनता को भी कहा गया कि वे सोशल मीडिया पर #MyCleanIndia लिखकर अपने सहयोग को साझा करें।

 

सरकार ने इस अभियान को सफल बनाने के लिये जनता से निवेदन किया कि वो अपने आसपास सफाई करने की दिशा में प्रतिवर्ष 100 घंटे का श्रमदान करें।

 

इस अभियान के शुरुआत करने के दिन यानि 2 अक्टूबर 2014 से गांधीजी की 150 वीं जयंती (2 अक्दूबर 2019) तक देश कोखुले में शौच से मुक्तकरने का लक्ष्य रखा गया था जिसे देशभर में 100 मिलियन से अधिक शौचालयों का निर्माण करके प्राप्त कर लिया गया।

 

गांधीजी का स्वच्छ भारत का सपना:-

SWACHH BHARAT ABHIYAN ESSAY IN HINDI

 

गांधीजी ने स्वच्छ भारत का सपना संजोया था। उनका कथन था कि स्वच्छता, स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है” उनका मानना था कि साफसफाई रखना ईश्वर भक्ति करने के बराबर है।

 

गांधीजी को बचपन से ही सफाई कर्मचारियों के प्रति सम्मान की भावना थी। एक बार बचपन में उन्होने अपनी मां की उस बात का विरोध किया था जब उनकी मां ने सफाई कर्मचारी को ना छूने और उससे दूर रहने के लिए कहा था।

 

गांधीजी का मानना था कि साफसफाई करना प्रत्येक व्यक्ति का काम है। यह समाज के किसी एक तबके का कार्य नहीं है। इसीलिए जब भी कोई व्यक्ति उनके साथ आश्रम में रहने की इच्छा जाहिर करता था तो उनकी पहली शर्त यह होती थी कि आश्रम में रहने वालों को वहाँ की सफाई खुद करनी पड़ेगी और अपने शौच का निस्तारण भी खुद करना पड़ेगा। 

 

गांधीजी किसी व्यक्ति के मैले को किसी एक जाति विशेष के लोगों द्वारा ढोने की प्रथा के सख्त खिलाफ थे।

 

गांधीजी ने स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रमों में स्वच्छता को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होने जब 1920 में गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की तो वहां के शिक्षकों, छात्रों और कार्यकर्ताओं को परिसर में स्वच्छता को लेकर पहले ही दिशानिर्देश दे दिये थे।

 

उन्होने समाचारपत्रों के माध्यम से भारतीय रेलवे की निम्न श्रेणियों और धार्मिक स्थलों में फैली गंदगी की तरफ ब्रिटिश सरकार का ध्यान आकर्षित करने की भी कोशिश की। वे लगभग प्रत्येक सम्मेलन में स्वच्छता का मुद्दा उठाते थे।

 

इस तरह गांधीजी बहुत पहले ही समझ चुके थे कि भारतीयों में स्वच्छता के प्रति उदासीनता है और उन्हे जागरूक करना जरूरी है। उनके अनुसार सभ्य और विकसित मानव समाज के लिए स्वच्छता बहुत ही जरूरी है। 

 

गांधीजी जब यूरोप में थे तो वहाँ के लोगों की स्वच्छता के प्रति समझ को देखा और फिर उनके अंदर भी स्वच्छता को लेकर जागरूकता पैदा हुई। तब से लेकर अपनी मृत्यु के दिन तक गांधीजी लगातार सफाई रखने पर जोर देते रहे और एक स्वच्छ भारत का सपना देखते रहे।

 

स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य क्या थे:-

2 अक्टूबर 2014 को जब इस अभियान की शुरुआत की गई थी तब शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलगअलग उद्देश्य और लक्ष्य निर्धारित किए गए थे।

 

शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य निम्नलिखित थे:-

1. 1.04 करोड़ परिवारों के लिए 2.5 लाख सामुदायिक शौचालय, 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करना।

2. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रत्येक शहर में सुविधाएं प्रदान करना।

3. प्रमुख सार्वजनिक स्थलों जैसे पर्यटन स्थल, बाजार, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाना।

4. खुले में शौच की प्रथा को बंद करना तथा सभी परंपरागत शौचालयों में फ्लश लगाना

5. मैला ढ़ोने की प्रथा को समाप्त करना

 

इस कार्यक्रम को पांच साल की अवधि में 4401 शहरों में लागू करने का लक्ष्य रखा गया था। कार्यक्रम पर व्यय होने वाले 62,009 करोड़ रुपए में से केंद्र सरकार की तरफ से 14,623 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए थे।

 

 

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य निम्नलिखित थे:-

1. ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त करना।

2. लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों का निर्माण किया करना जिसमें 1 लाख 34 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था।

3. ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे को जैव उर्वरक और ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित करना।

4. ग्रामीण क्षेत्रों की साफसफाई पर विशेष ध्यान देना। 

5. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत के माध्यम से सूखे और गीले अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण की अच्छी प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित करना।

 

स्वच्छ भारत अभियान की प्रगति:-

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2 अक्टूबर 2014 को मात्र 38.70% घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध थी और 2015-16 में 46,963 गाँव ही खुलें में शौच से मुक्त थे।

 

सरकार ने इस अभियान के शुरुआत के दिन यानि 2 अक्टूबर 2014 को यह लक्ष्य निर्धारित किया था कि पाँच सालों में प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण कर दिया जाएगा और सभी गाँवों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया जाएगा।

 

2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती तक देश ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया तथा स्वयं को खुले में शौच से मुक्तघोषित किया। इस तरह अभियान के इस चरण में निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया। देश के सभी घरों में शौचालयों का निर्माण कर दिया गया है और 6,03,175 गाँवों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया गया है। इस पाँच साल की अवधि ( 2 अक्टूबर 2014 से 2 अक्टूबर 2019) के दौरान भारत में 100 मिलियन से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया।

 

स्वच्छ भारत अभियान(ग्रामीण)चरणII:-

देश ने इस अभियान के पहले चरण के अंतर्गत अपना लक्ष्य हासिल तो कर लिया है, लेकिन खुले में शौच की प्रथा से मुक्ति को स्थायी रखना एक बहुत बड़ी चुनौती है।

 

इसी को देखते हुए भारत सरकार ने अभियान के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है। इस चरण को ODF Plus की संज्ञा दी गई है।

 

स्वच्छ भारत अभियान के दूसरे चरण को 2020-2021 से 2024-2025 की अवधि के लिए लागू किया गया है। इस चरण में कुल 1,40,881 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण के तहत गांवों में ठोस एवं तरल कचरे के सुरक्षित प्रबंधन पर विशेष रूप से बल दिया जाएगा। 

 

स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण), चरण – II के उद्देश्य:-  

1. देश के प्रत्येक गांव, ग्राम पंचायत, ब्लॉक, जिला और राज्य में खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति को लंबे समय तक बनाए रखना।

2. लोगों द्वारा शौचालयों का नियमित उपयोग किया जा रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करना।

3. व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्वच्छता का पालन करवाना।

4. ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र स्वच्छता के लिए ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की उपलब्धता को सुनिश्चित करना।

5. ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना।

 

इस चरण के अंतर्गत इस अभियान को गाँवों में जमीनी स्तर पर लागू करवाने के लिए जमीनी सैनिकों अथवा ‘स्वछाग्राहियों जिन्हें पहलेस्वच्छता दूत कहा जाता था, की एक सेना तैयार की गई है।

 

स्वच्छता प्रौद्योगिकी को भी इस चरण में बढ़ावा देने की बात कही गई है जिसमें दो पिट वाले शौचालय (Twin pit toilet) के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

स्वच्छ भारत अभियान की जरुरत क्यों पड़ी? :-

यह बहुत ही सोचनीय बात है कि साफसफाई के लिए सरकार को अभियान चलाने की जरूरत पड़ रही है, जबकि यह प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी बनती है कि वह अपने आसपास साफसफाई रखे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे।

 

लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियाँ भी होती हैं कि कोई व्यक्ति चाहकर भी स्वच्छता की तरफ ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाता है।

 

इस अभियान को दो अलगअलग मंत्रालयों द्वारा चलाये जाने का प्रमुख कारण भी यही है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की अपनी स्वच्छता संबंधी अलगअलग  आवश्यकताएँ हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लिये जहाँ पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को इस अभियान के कार्यान्यावन की ज़िम्मेदारी दी गई है वहीं शहरी क्षेत्रों में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा इस अभियान को निष्पादित किया जा रहा है।

 

यदि हम गाँवों की बात करें तो वहाँ शौचालय नहीं होने के कारण लोग खुले में शौच के लिए जाते थे। यह उनकी आर्थिक मजबूरी भी होती थी जिसकी वजह से ग्रामीण लोग अपने घरों में शौचालय का निर्माण नहीं कर पाते थे। साथ ही उनके अंदर स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी होती थी और शौचालय का घर में होना वे लोग अच्छा नहीं मानते थे।

 

इस अभियान के अंतर्गत सरकार की तरफ से ग्रामीण लोगों को अपने घर में शौचालय निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई। उन्हें इस बात की भी जानकारी दी गई कि घर में शौचालय होना बुरी बात नहीं है और यह स्वास्थ्य के लिए कितना जरूरी है। उन्हें खुले में शौच के नुकसान के बारे में भी बताया गया। 

 

इस तरह इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में साफसफाई के लिए और लोगों के अंदर शौचालय के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के अभियान की सख्त जरूरत थी।

 

साफसफाई के मामले में शहरों की भी स्थिति अच्छी नहीं है। यहाँ प्रत्येक घर में शौचालय तो उपलब्ध हैं और खुले में शौच की भी बहुत बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन यहाँ की सबसे बड़ी समस्या है अपशिष्ट पदार्थों का उचित प्रबंधन।

 

शहरवासी अपने घर से निकले गंदगी को एक उचित स्थान ना मिलने के कारण कहीं भी फेंक देते थे। ये गंदगी या तो सड़कों पर बिखर जाती थी या नालों में पानी के बहाव के साथ शहर से बाहर निकल जाती थी। कभीकभी ये गंदगी नालों में जम जाती हैं और जब कभी वर्षा होती है तो पानी का बहाव रुक जाता है जिसके कारण शहरों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

 

इस तरह हम कह सकते हैं कि शहरों में स्वच्छता को लेकर दो प्रमुख चुनौतियाँ हैं

1. ठोस और तरल अपशिष्ट का उचित निपटान

2. उचित सीवरेज प्रबंधन

 

स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरों में ठोस और तरल अपशिष्ट के उचित निपटान के लिए नगरपालिकाओं के कर्मचारी अब कचरे वाली गाड़ी लेकर हर एक घर के दरवाजे पर जाते हैं। इससे अब शहरवासी अपने घर से निकले कूड़ेकरकट को सफाई कर्मचारी को दे देते हैं और उसका उचित निपटान कर दिया जाता है। 

 

इस तरह शहर में अब अपशिष्ट पदार्थों को कहीं भी फेंक देने की समस्या समाप्त हो चुकी है।

 

शहरों में नाले के पानी के आसानी से बहाव के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं अर्थात उचित सीवरेज प्रबंधन का काम भी अपनी प्रगति पर है।

 

अब यह स्पष्ट हो गया है कि अपने देश में साफसफाई में इस अभियान का कितना महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अभियान को निरंतर तब तक चलते रहना चाहिए जब तक अपने देश के हर एक सड़क, गली, मुहल्ले, गाँव से गंदगी का नामोनिशान नहीं मिट जाता है।

 

स्वच्छ  भारत  अभियान  के प्रति हमारी जिम्मेदारी:-

अपने देश, शहर या गाँव में साफसफाई की जिम्मेदारी हमारी सरकार, नगरपालिका या गाँव स्तर की समितियों की होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार इस देश में स्वच्छता को लेकर कितनी गंभीर है।

 

लेकिन हम अपने देश को स्वच्छ रखने के लिए केवल सरकार पर ही निर्भर नहीं रह सकते हैं। हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि अपने आसपास के वातावरण को साफसुथरा रखें और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें।

 

यह सच है कि हम दूसरों को इस कार्य के लिए मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन स्वयं हमें जानबूझकर या अनजाने में कहीं भी कचरा नहीं फेंकना चाहिए। इसी आदत का परिणाम है जो हमारे सामने है और जिसकी वजह से देश में एक ऐसे अभियान की जरूरत पड़ी जिसमें करोड़ों रुपयों का व्यय किया जा रहा है। 

 

यदि हम स्वयं स्वच्छता का ध्यान पहले से रखते तो इस तरह के किसी भी अभियान की जरूरत नहीं पड़ती और इसमें व्यय होने वाले धन को अन्य योजनाओं में लगाया जा सकता था।

 

फिर भी अभी समय है कि स्वच्छता के प्रति हम सचेत हो जाएँ और अपने देश से गंदगी को समाप्त करने के कर्तव्य का निर्वहन करें। इसकी शुरुआत हम अपने घर से ही कर सकते हैं। 

 

घर से निकले कूड़े को कहीं भी इधरउधर ना फेंके। कचरा उठाने वाली गाड़ी में ही कचरा डालें। यदि कोई व्यक्ति गंदगी फैलाता है तो उसे ऐसा करने से मना करें और उचित स्थान पर ही कचरा डालने के लिए समझाएँ।

 

जिस दिन देश का प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझ जाएगा, उस दिन इस तरह के अभियान की जरूरत नहीं पड़ेगी और हमारा देश विश्व में स्वच्छता की रैंकिंग में भी अच्छा स्थान प्राप्त कर लेगा।

 

वैसे इस अभियान ने लोगों के अंदर स्वच्छता को लेकर थोड़ी जागरूकता तो जरूर पैदा कर दी है। लोग इस अभियान में अपना भरसक योगदान भी दे रहे हैं। प्रत्येक क्षेत्र की नामचीन हस्तियाँ इस अभियान में भाग ले रही हैं, चाहे वो फिल्म उद्योग जगत से जुड़े लोग हों या खेल से, सभी लोग इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।

 

उपसंहार:-

हमारे देश में स्वच्छता एक बहुत ही बड़ा मुद्दा रहा है। अपने देश ने जिस प्रकार आर्थिक दृष्टि से सफलताएँ अर्जित की हैं, उस अनुपात में हम स्वच्छता की दौड़ में पिछड़ते चले गए। हम अपने विकास करने की दौड़ में अपने शहरों को स्वच्छ रखना भूल गए। किसी भी देश का विकास बहुत ही जरूरी है लेकिन इस कीमत पर नहीं कि शहर गंदगी से भर जाएँ।

 

इसलिए किसी ऐसी सरकार को इसकी जिम्मेदारी तो लेनी ही थी जो स्वच्छता के महत्व को अच्छी तरह से समझ सके। हमारी वर्तमान सरकार ने इसे बखूबी समझा और स्वच्छ भारत अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत की। 2 अक्तूबर 2014 में शुरू किए गए इस अभियान ने निर्धारित अवधि के अंदर अपने लक्ष्य को प्राप्त भी कर लिया और ग्रामीण क्षेत्रों में अगले चरण की शुरुआत भी हो चुकी है।

 

अब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि इस अभियान के द्वारा प्राप्त सुखद परिणाम को बरकरार रखने में सरकार का सहयोग करें। इसके लिए हमें केवल अपने घरों और आसपास की सफाई का ही ध्यान रखना पड़ेगा। हमारे द्वारा दिया गया इतना छोटा सा योगदान  भी इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

हमारे देश में स्वच्छता को लेकर बहुत पहले से ही कुछ लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जिन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह कहा जाता है, ने भी अपने एक लेख में भारतीय त्योहारों को म्यूनिसपालिटी की संज्ञा दी है। उनके अनुसार जिस प्रकार म्यूनिसपालिटी शहर के साफ सफाई का ध्यान रखती हैं, वैसे ही हमारे यहाँ के त्योहार भी म्यूनिसपालिटी की तरह हमारे घर तथा शरीर के साफसफाई का ध्यान रखते हैं। त्योहार के दिन हम अपने घर के साफसफाई के साथसाथ घर के आसपास भी सफाई करते हैं। 

 

इसलिए यदि हम केवल अपने घर और आसपास की ही सफाई रखते हैं तो इससे ना केवल हमारा घर बल्कि पूरा देश ही स्वच्छ हो जाएगा।

 

तो आइए हम सब मिलकर एक शपथ लेते हैं कि आज से ही हम अपने घर के साथसाथ आसपास की सफाई का भी ध्यान रखेंगे और दूसरों को भी सफाई के प्रति प्रेरित करेंगे।

 

यह निबंध आपलोगों को कैसा लगा, कमेन्ट करके जरूर बताएं और अच्छा लगा हो तो कृपया शेयर करना ना भूलें।

 

आप अपना कोई ऐसा अनुभव भी साझा कर सकते हैं जिसने आपको स्वच्छता के प्रति जागरूक किया हो या आपने किसी को सफाई को लेकर कुछ समझाया हो।

 

SWACHH BHARAT ABHIYAN ESSAY IN HINDISWACHH BHARAT ABHIYAN ESSAY IN HINDISWACHH BHARAT ABHIYAN ESSAY IN HINDI

 

 

यह भी पढ़ें:-  

Essay on Independence Day in Hindi

 

🙏धन्यवाद 🙏


Leave a Comment